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हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा,गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा कलेक्टर ही तय करेंगे
महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं
उज्जैन। उज्जैन के ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में नेताओं और वीआईपी को प्रवेश देने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इससे पहले इस मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई हो चुकी थी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही इंदौर हाईकोर्ट का फैसला महाकाल मंदिर समिति पर लागू रहेगा, जिसमें उज्जैन कलेक्टर को यह अधिकार दिया गया था कि वे तय करें कि कौन वीआईपी है और कौन नहीं।
दरअसल, महाकाल मंदिर में आम श्रद्धालुओं के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के बाद इंदौर के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री और दर्पण अवस्थी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि देशभर से लाखों श्रद्धालु महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें गर्भगृह के बाहर से ही दर्शन करने पड़ते हैं, जबकि नेता और प्रभावशाली लोग आसानी से गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा।
गर्भगृह में प्रवेश का फैसला फिलहाल कलेक्टर करेंगे
करीब छह महीने पहले इंदौर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया था कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, यह तय करने का अधिकार उज्जैन कलेक्टर के पास है। अदालत ने कहा कि यदि कलेक्टर किसी विशेष दिन किसी व्यक्ति को अनुमति देते हैं, तो उसे वीआईपी माना जाएगा।
ढाई साल से बंद है गर्भगृह
दरअसल, 4 जुलाई 2023 को सावन महीने में आने वाली भारी भीड़ को देखते हुए महाकालेश्वर मंदिर का गर्भगृह 11 सितंबर 2023 तक बंद कर दिया गया था। उस समय मंदिर समिति ने कहा था कि सावन माह के समाप्त होते ही गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। लेकिन इसके बाद गर्भगृह खुला नहीं है। महाकाल लोक बनने से पहले मंदिर में रोजाना 20 से 30 हजार श्रद्धालु आते थे। अक्टूबर 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद भक्तों की संख्या चार गुना बढक़र डेढ़ से दो लाख तक पहुंच गई।
