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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के भलस्वा, गाजीपुर और ओखला क्षेत्रों में स्थित कचरे के विशाल पहाड़ों को खत्म करने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण कार्ययोजना साझा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कचरा प्रबंधन की वर्तमान स्थिति और भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा करते हुए बताया कि सरकार ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइट्स पर जमी लीगेसी वेस्ट (सालों से जमा पुराने कचरे) को साफ करने के लिए पूरी शिद्दत से जुटी हुई है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि इस साल के अंत तक इन दोनों साइट्स पर मौजूद दशकों पुराने कचरे के ढेर को पूरी तरह संसाधित कर समाप्त कर दिया जाएगा।
लीगेसी वेस्ट के निपटान को एक बड़ी चुनौती मानते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2026 के अंत तक ओखला और भलस्वा को कचरा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कचरे में मिट्टी, प्लास्टिक, कांच और धातुओं का मिश्रण होता है, जिसे वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग कर (सेग्रीगेट) प्रोसेस किया जा रहा है। हालांकि, गाजीपुर लैंडफिल साइट की जटिलताओं को देखते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि वहां के कचरे के पहाड़ को पूरी तरह खत्म करने में दो साल का अतिरिक्त समय लग सकता है। दिल्ली में प्रतिदिन पैदा होने वाले नए कूड़े के शत-प्रतिशत प्रबंधन के लिए प्रसंस्करण संयंत्रों (प्रोसेसिंग प्लांट्स) की क्षमता में लगातार विस्तार किया जा रहा है। पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि पिछले ढाई दशकों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सरकारों ने कचरा प्रबंधन और बायोगैस संयंत्रों की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाए। उन्होंने दावा किया कि राजधानी का पहला प्रभावी बायोगैस प्लांट उनकी सरकार के कार्यकाल में ही शुरू हो सका है। कचरा प्रबंधन की नई तकनीकों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 200 टन गोबर संसाधित करने वाला वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट सुचारू रूप से कार्य कर रहा है, जबकि 400 टन की अतिरिक्त क्षमता वाले नए संयंत्र इस वर्ष के अंत तक चालू हो जाएंगे। सरकार का लक्ष्य दिल्ली को इन कचरे के पहाड़ों से मुक्ति दिलाकर एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है।
