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Tuesday, January 27, 2026
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ममता बनर्जी ने एसआईआर को बताया वोटबंदी.. कहा- उनका गला भी काट सकती है…

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने निर्वाचन आयोग (Election Commission) द्वारा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) (Special Intensive Revision (SIR) of Electoral Rolls) कराने को ‘वोटबंदी’ करार दिया। साथ ही उन्होंने आयोग से यह प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की। बनर्जी ने कहा कि भाजपा (BJP) एसआईआर के खिलाफ बोलने पर उन्हें जेल भेज सकती है या उनका गला भी काट सकती है। बनर्जी ने यह भी कहा कि वह चुनाव से ठीक पहले एसआईआर कराने की जल्दबाजी को समझ नहीं पा रही हैं।

ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में मीडिया से कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार एसआईआर के नाम पर लोगों को परेशान कर रही है। जैसे कुछ मुद्राओं को चलन से बाहर करना ‘नोटबंदी’ थी, वैसे ही एसआईआर ‘वोटबंदी’ है। उन्होंने कहा कि यह ‘सुपर इमरजेंसी’ का ही एक और रूप है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले एसआईआर कराने की इतनी जल्दी मुझे समझ नहीं आ रही। निर्वाचन आयोग को यह प्रक्रिया तुरंत बंद करनी चाहिए। मतदाता सूची का पुनरीक्षण दो या तीन महीने में पूरा नहीं हो सकता। इसे जबरन अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से लोगों के मताधिकार पर अंकुश नहीं लगाने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने जीएसटी की आलोचना की और इसे एक भूल बताया और कहा कि इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनता को जीएसटी के नाम पर लूट रही है। बता दें कि पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में मतदाता सूचियों के एसआईआर में राहत की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने पेश किया गया। वकील ने कि याचिका को मंगलवार को सूचीबद्ध किए जाने का यह कहते हुए अनुरोध किया कि अन्य राज्यों में एसआईआर को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर कल सुनवाई होनी है।

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पहले से ही कलकत्ता उच्च न्यायालय में लंबित है, जहां याचिकाकर्ता ने एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने और प्रक्रिया की अदालत की निगरानी में निगरानी की मांग की है। हाई कोर्ट ने हाल ही में चुनाव आयोग को संशोधन के लिए अपनाई जा रही प्रक्रियाओं की व्याख्या करते हुए हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

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