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Tuesday, January 27, 2026
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दिग्विजय सिंह नहीं जाएंगे राज्यसभा, कई नेता दौड़ में, कमलनाथ को मिलेगा मौका

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की सियासत के ‘चाणक्य’ पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने अचानक ऐलान किया कि वह राज्यसभा नहीं जाएंगे इससे सियासी हलकों में हलचल मच गई है। बता दें दिग्विजय सिंह कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है, लेकिन इससे पहले ही राज्यसभा नहीं जाने उनकी घोषणा से दिल्ली से भोपाल तक कांग्रेस में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि दिग्विजय सिंह का अचानक राज्यसभा से मोहभंग क्यों हो गया? वहीं यह सवाल भी उठने लगा कि सिंह की जगह अब मप्र से कांग्रेस किसे राज्यसभा भेजेगी।
मीडिया रिपोर्ट में पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दिग्विजय सिंह का यह फैसला कोई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की रणनीतिक सोच का हिस्सा है। यह कदम कांग्रेस के उस नए राजनीतिक रोडमैप से जुड़ा है, जिसे राहुल गांधी पिछले कुछ सालों से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व का फोकस अब केवल संसद के अंदर आक्रामक विपक्षी भूमिका निभाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा करना प्राथमिकता बन चुका है।
इसी सोच के तहत वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों में लगाने और युवा नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह को भी इसी रणनीति के तहत राज्यसभा की भूमिका से मुक्त कर दोबारा मैदान में उतारने की तैयारी है। सूत्रों की मानें तो पार्टी दिग्विजय को एक बार फिर मध्य प्रदेश में बड़े संगठनात्मक मिशन की जिम्मेदारी सौंप सकती है। 2017-18 में की गई उनकी 3300 किलोमीटर लंबी नर्मदा परिक्रमा आज भी कांग्रेस के लिए एक मजबूत राजनीतिक प्रतीक मानी जाती है। उस परिक्रमा ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं में जान फूंकी थी, बल्कि 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को वैचारिक और भावनात्मक बढ़त भी दिलाई थी।
अब चर्चा है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले एक और नर्मदा परिक्रमा या इसी तरह का कोई बड़ा जनसंपर्क अभियान दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कराया जा सकता है, ताकि बिखरे संगठन को जोड़ा जा सके और युवा कार्यकर्ताओं को दिशा दी जा सके। इस बीच दिग्विजय सिंह के फैसले के बाद कांग्रेस में सामाजिक संतुलन की बहस भी तेज हो गई है। अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मांग रखी है कि राज्यसभा में इस बार दलित समाज को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि मध्य प्रदेश की करीब 17 फीसदी अनुसूचित जाति आबादी की यह लंबे समय से अपेक्षा रही है। हालांकि इस मांग पर दिग्विजय सिंह ने साफ कर दिया कि टिकट का फैसला उनके हाथ में नहीं है, लेकिन यह जरूर तय है कि वे अपनी सीट खाली कर रहे हैं।
कमलनाथ कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं। चर्चा है कि वे एक बार फिर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका चाहते हैं। यदि उन्होंने दावेदारी ठोकी, तो बाकी नामों की राह मुश्किल हो सकती है। जीतू पटवारी मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। आक्रामक तेवर, विधानसभा में सक्रिय भूमिका और संगठनात्मक पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। वहीं अरुण यादव पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व पीसीसी चीफ रह चुके हैं। संगठन और दिल्ली दोनों में उनकी स्वीकार्यता है। अजय सिंह (राहुल भैया) पूर्व नेता प्रतिपक्ष रहे हैं, जो लंबे समय से किसी बड़ी जिम्मेदारी की प्रतीक्षा में हैं।
दिग्विजय सिंह के हटने के साथ ही कांग्रेस की एकमात्र सुरक्षित मानी जा रही राज्यसभा सीट अब सियासी मुकाबले का केंद्र बन गई है। पार्टी में कई बड़े नामों की चर्चा शुरू हो चुकी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दिल्ली में लॉबिंग और समीकरण तेज होंगे। सबसे चर्चित नाम पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का है। समय-समय पर यह संकेत मिलते रहे हैं कि वे एक बार फिर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के इच्छुक हैं। अगर कमलनाथ राज्यसभा की दौड़ में उतरते हैं, तो उनके राजनीतिक कद और अनुभव के चलते बाकी दावेदारों की राह आसान नहीं रहेगी।
राज्यसभा की मध्य प्रदेश में कुल 11 सीटें हैं, जिनमें से आठ पर बीजेपी और तीन पर कांग्रेस का कब्जा है। 2026 में तीन सीटें खाली हो रही हैं, लेकिन मौजूदा संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस के लिए फिलहाल सिर्फ एक सीट ही सुरक्षित मानी जा रही है। ऐसे में दावेदारी की लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है, क्योंकि हर बड़ा नेता जानता है कि मौका एक ही है और दावेदार कई। कुल मिलाकर दिग्विजय सिंह का राज्यसभा से हटना कांग्रेस की बदलती रणनीति, पीढ़ीगत बदलाव और मध्य प्रदेश में संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस खाली होने वाली सीट पर किसे मौका देता है और क्या यह फैसला पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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