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आम बजट 2026 से MP को कितनी उम्मीद? सिंहस्थ 2028 के लिए पैकेज और रुके फंड पर फोकस

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MP News: मोहन सरकार को आम बजट (Union Budget 2026) से बड़ी अपेक्षाएं है। सरकार चाहती है कि सिंहस्थ के लिए केंद्र उसे 20 हजार करोड़ का जंबो बजट दे। तो केंद्रीय परियोजनाओं की रोकी गई राशि भी मिले। नई परियोजनाओं में मप्र पर विशेष ध्यान दिया जाए और 15वें वित्त आयोग द्वारा तय मप्र की जीएसडीपी को मान्य किया जाए।

प्रदेश के लिए 2028 का सिंहस्थ बड़ा आयोजन है, राज्य सरकार तो इसमें अपनी ओर से पूरी ताकत झोंक रही है लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों के लिए बड़ी राशि की जरुरत है। उधर मप्र की बढ़ती आबादी के अनुरूप जरूरत बढ़ी हैं, योजनाओं का बोझ भी बढ़ता जा रहा है। इन सभी का संतुलन बनाए रखने के लिए बड़ी राशि चाहिए। वहीं केंद्र से पूर्व की योजनाओं में कमिटेड बजट रुकने से भी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

आम बजट से मप्र को इसलिए अपेक्षा

  1. 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) ने मप्र की जीएसडीपी 16,94,477 करोड़ रुपए को मान्य की है लेकिन केंद्र द्वारा प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) अभी भी 15,44,141 करोड़ रुपए ही मान रहा है। इसके कारण मप्र कर्ज की सीमा नहीं बढ़ा पा रहा है। आम बजट में यदि केंद्र यह नई जीएसडीपी को मान्य कर ले तो मप्र के लिए कर्ज लिए जाने के लिए की जाने वाली गणना का दायरा बढ़ जाएगा।
  2. वर्ष 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ होना है। सरकार इसको भव्य बनाने के प्रयासों में जुटी है। 8 हजार करोड़ से अधिक के कामों को चालू कराया जा चुका है। कई स्तर पर काम होने बाकी है। सरकार का अनुमान है कि इन कामों पर करीब 20 हजार करोड़ का खर्च आएगा। इसका आम बजट में प्रावधान हो जाए। (Simhastha 2028 Package)
  3. जल जीवन मिशन के लिए केंद्र के अंश के विडा वर्ष 2024-25 की 4370 करोड़ और 2025-26 की 3750 करोड़ और कुल 8120 करोड़ की राशि रोक रखी है, इसके कारण मैदानी स्तर पर काम नहीं हो पा रहे हैं। केंद्र ने इन कामों को पूरा करने के लिए कई शर्ते रखी हैं।
  4. पूंजीगत कार्यों को और अधिक गति देने विडाीय वर्ष 2026-27 के आम बजट में पूंजीगत योजना के तहत बजट प्रावधान में बढ़ोतरी हो।
  5. पीपीपी मॉडल वाली परियोजनाओं के लिए आर्थिक कार्य विभाग की वायबिलिटी गैप फंडिंग योजना का सरलीकरण किया जाए। इसमें कौशल विकास, हरित एवं जलवायु अनुकूल परियोजनाओं को विशेष प्रोत्साहन दिया जाए।
  6. प्रदेश की आवश्यकताओं को देखते हुए केन्द्रीय योजनाओं के मूल स्वरूप को बरकरार रखते हुए आंशिक बदलाव की स्वतंत्रता मिले।
  7. केंद्र की बीमा योजनाओं में एक ही हितग्राही का किसी विशेष बीमा सुरक्षा योजना में एक से अधिक बैंक खातों से पंजीयन एवं प्रीमियम का भुगतान रोकने के लिए जन सुरक्षा पोर्टल में प्रावधान हो।
  8. एसएनए स्पर्श व्यवस्था में जारी केंद्रीय स्वीकृति को आगामी वित्तीय वर्ष में भी जारी रखा जाए। इस प्रणाली पर ऑनबोर्ड की गई योजनाओं की प्रोत्साहन राशि जल्द जारी की जाए।
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News Desk

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