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Friday, May 1, 2026
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हाईकोर्ट ने दिया विशाखापट्टनम पोर्ट पर खड़े विदेशी जहाज को गिरफ्तार करने का आदेश

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नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने विशाखापट्टनम पोर्ट पर खड़े विदेशी बल्क कैरियर एमवी पोलर स्टार को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई लातवियाई शिप मैनेजमेंट कंपनी द्वारा जहाज मालिकों के खिलाफ बकाया भुगतान के विवाद के चलते हुई। कंपनी का दावा है कि जहाज मालिक ने मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट के तहत देय रकम का भुगतान नहीं किया, जो करीब 8.33 लाख डॉलर 7.6 करोड़ रुपए से ज्यादा है। कोर्ट ने एडमिरल्टी जूरिस्डिक्शन का इस्तेमाल करते हुए जहाज को तब तक डिटेन रखने का निर्देश दिया जब तक मालिक दावा राशि जमा या स्वीकार्य सिक्योरिटी पेश नहीं करते।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री कानून के मुताबिक जहाज की गिरफ्तारी का मतलब यह नहीं कि जहाज को जब्त कर लिया गया है, बल्कि उसे बंदरगाह से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी जाती है। यह कदम विवादित राशि की वसूली के लिए उठाया जाता है। जहाजों का ऑपरेशन महंगे और दैनिक रूप से लाखों डॉलर का होता है, इसलिए डिटेंशन मालिकों पर वित्तीय दबाव डालता है। इस मामले में कोर्ट ने साफ किया कि जहाज का पूरा ढांचा, इंजन, मशीनरी, उपकरण, फर्नीचर, ईंधन और अन्य तकनीकी सामान अरेस्ट के दायरे में होंगे, हालांकि कार्गो की लोडिंग और अनलोडिंग जारी रह सकती है। 
विदेशी जहाज पर भारत का कानून कैसे लागू होता है, यह समुद्री कानून के सिद्धांतों के तहत समझा जा सकता है। जब कोई विदेशी जहाज किसी देश के पोर्ट या सीमा में प्रवेश करता है, तो वह अस्थायी रूप से उस देश के कानून के अधीन हो जाता है। इसके तहत जहाज पर मौजूद लोग स्थानीय नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होते हैं और यदि जहाज से संबंधित कोई विवाद होता है तो स्थानीय कोर्ट कार्रवाई कर सकती है। एमवी पोलर स्टार के विशाखापत्तनम पोर्ट पहुंचते ही यह जहाज भारत के कानून के दायरे में आ गया। इस विवाद की शुरुआत एक शिप मैनेजमेंट एग्रीमेंट से हुई। 
रिपोर्ट के मुताबिक लातविया की डॉसन शिप मैनेजमेंट सिया ने 5 सितंबर 2024 को जहाज के मालिकों के साथ समझौता किया था। समझौते के मुताबिक कंपनी जहाज के संचालन, क्रू की भर्ती, तकनीकी रखरखाव, मशीनरी खरीद और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करती। इसके एवज में मालिक को प्रति माह 17,500 डॉलर की मैनेजमेंट फीस और अन्य संचालन खर्च चुकाने थे।
कंपनी का आरोप है कि मालिक लगातार भुगतान में चूक करते रहे और अक्टूबर 2025 में हुए सेटलमेंट एग्रीमेंट के बावजूद भी पहली किस्त का भुगतान नहीं हुआ। वर्तमान में बकाया राशि 8,33,148 डॉलर बताई गई है, जिसमें मैनेजमेंट फीस, ऑपरेशन खर्च और कानूनी खर्च शामिल हैं।
कंपनी ने कोर्ट को बताया कि भुगतान के लिए कई बार ईमेल भेजे गए, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। इसलिए जहाज के भारत पहुंचते ही कोर्ट से अरेस्ट का आदेश लिया गया। अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में जहाजों की गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण कानूनी उपाय है। दुनिया का करीब 90 फीसदी व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, और यह नियम तय करता है कि सेवा देने वाली कंपनियों को समय पर भुगतान मिले और कॉन्ट्रैक्ट का पालन हो। 

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News Desk

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