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विद्याकर कवि सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि कर्तव्यपरायणता, सादगी और सिद्धांतवादी राजनीति के पुरोधा थे — सिद्धार्थ मोहन कवि

दिनांक 31 जनवरी 2026 को बिहार की राजधानी पटना सहित राज्य के कई जिलों में पूर्व मंत्री, बिहार सरकार एवं पूर्व बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष स्वर्गीय विद्याकर कवि की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ विभिन्न समाजों, धर्मों और वर्गों के लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनकी विचारधारा को नमन किया। स्व. कवि का जीवन बिहार की राजनीति और सामाजिक चेतना को नैतिकता, सादगी और जनसेवा की दिशा देने वाला रहा है।

इस क्रम में स्व. विद्याकर कवि के पौत्र, सुप्रसिद्ध लेखक एवं कांग्रेस नेता सिद्धार्थ मोहन कवि से बातचीत में उन्होंने कहा,
“विद्याकर कवि जी उन विरले राजनेताओं में से थे, जिनके लिए राजनीति सत्ता का साधन नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और विकास पहुँचाने का माध्यम थी। मंत्री पद पर रहते हुए भी उनकी पहचान उनकी विनम्रता, ईमानदारी और आमजन से गहरे जुड़ाव के कारण बनी रही। एक जननेता के साथ-साथ वे एक संवेदनशील मानव और आदर्श पारिवारिक व्यक्ति भी थे।”

सिद्धार्थ मोहन कवि ने जानकारी दी कि इस अवसर पर बिहार कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम में स्व. विद्याकर कवि की भव्य पुण्यतिथि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने स्व. कवि के अनुशासन, परिश्रम और सेवाभाव पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, स्व. कवि के कनिष्ठ पुत्र एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हिमांशु मोहन कवि, प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौर, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी जितेन्द्र पासवान, ब्रजेश पांडेय, बैजनाथ शर्मा, गुरुदयाल सिंह, हितार्थ मोहन कवि सहित दर्जनों वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने स्व. कवि के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके अतिरिक्त स्व. विद्याकर कवि के गृह क्षेत्र आलमनगर में भी उनकी स्मृति में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रो. सनत कवि द्वारा किया गया, जिसमें जिले के कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता तथा समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लेकर स्व. कवि को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

उल्लेखनीय है कि स्व. विद्याकर कवि के ज्येष्ठ पुत्र स्व. विभूति कवि भी बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस में महासचिव, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, जिला प्रभारी सहित कई महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हुए संगठन को सशक्त बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।

आज के समय में, जब सार्वजनिक जीवन में विश्वास, पारदर्शिता और नैतिकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है, स्वर्गीय विद्याकर कवि जैसे नेताओं का स्मरण यह विश्वास दिलाता है कि राजनीति में शुचिता, सिद्धांत और आदर्श आज भी संभव हैं।

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