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Thursday, October 15, 2026
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भारत से हारने का डर, इसलिए बॉयकॉट का बहाना? मैच से पहले ही PAK का गेम ओवर!

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टी20 विश्व कप 2026 को शुरू होने में अब बस चार दिन का वक्त रह गया है। सात फरवरी से शुरू हो रहे इस टूर्नामेंट से पहले पाकिस्तान का ड्रामा चालू हो गया है। टूर्नामेंट के बहिष्कार की गीदड़भभकी से शुरू हुआ ड्रामा अब भारत के खिलाफ 15 फरवरी को होने वाले मैच के बहिष्कार पर आकर रुक गया है। भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार कर पाकिस्तान अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहा है। साथ ही 21वीं सदी में पाकिस्तान का आईसीसी टूर्नामेंट्स भी भारत के खिलाफ रिकॉर्ड यह बताता है कि पड़ोसी मुल्का का भारत से खेलने का डर जायज है।

भारत के खिलाफ लगातार हार से डरा पाकिस्तान

टीम इंडिया के खिलाफ लगातार हार ने उन्हें डरा दिया है और यही वजह है कि उसने बॉयकॉट का रास्ता अपनाया। अगर मैच ही नहीं होगा तो उनकी अपने मुल्क में थू-थू नहीं होगी। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और दिग्गज कमेंटेटर संजय मांजरेकर के हालिया वीडियो ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट बहस को फिर से गर्म कर दिया है। वीडियो में मांजरेकर का साफ कहना है कि अब पाकिस्तान भारत के खिलाफ खेलने से कतरा रहा है, और इसकी वजह कोई राजनीति नहीं बल्कि खेल का डर है। मांजरेकर के शब्दों में, ‘सच्चाई ये है कि भारत के खिलाफ पाकिस्तान को हराना अब उनके लिए असाधारण चुनौती बन चुका है।’ भारत के खिलाफ मैच से बचने या बॉयकॉट की बात करना दर्शाता है कि पाकिस्तान खेल के मैदान में जवाब देने के बजाय बहाने तलाश रहा है।

मांजरेकर ने ‘महामुकाबले’ पर सवाल खड़े किए

भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबले को वर्षों से महामुकाबला कहा जाता रहा है, लेकिन मांजरेकर ने इस धारणा पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। मांजरेकर का कहना है कि अगर भारत-पाकिस्तान मैच नहीं भी होता है, तो इससे न टूर्नामेंट की वैल्यू घटती है और न ही भारतीय क्रिकेट को कोई नुकसान होता है। मांजरेकर के शब्दों में, ‘अगर भारत-पाकिस्तान मैच नहीं होता है, तो कोई बड़ी बात नहीं है। सच कहूं तो काफी समय से असली मैच, मैच से पहले होने वाले हाइप और ड्रामे के आसपास भी नहीं पहुंच पाता।’

‘भारत और पाकिस्तान अब क्रिकेट में एक स्तर पर नहीं’

मांजरेकर का सबसे तीखा हमला इसी बिंदु पर है। उन्होंने साफ कहा कि भारत और पाकिस्तान अब क्रिकेट के एक ही स्तर पर नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘इसका कारण बिल्कुल साफ है। भारत और पाकिस्तान क्रिकेट के मैदान पर अब एक ही स्तर पर नहीं हैं। 90 के दशक में और उससे पहले दोनों के बीच क्रिकेट में मुकाबला मजेदार होता था, क्योंकि पाकिस्तान एक मजबूत टीम हुआ करती थी, लेकिन अब नहीं।’ यह बयान भावनात्मक नहीं, बल्कि आंकड़ों और मौजूदा हालात पर आधारित नजर आता है।
 
‘भारत की जीत अब आदत सी लगती है’

संजय मांजरेकर ने अपने बयान में सबसे चर्चित तुलना भी की। उन्होंने कहा, ‘आज जब भारत पाकिस्तान को हराता है, तो ऐसा लगता है जैसे भारत किसी कमजोर टीम को हरा रहा हो।’ यह बात भले ही पाकिस्तान समर्थकों को चुभे, लेकिन पिछले दो दशकों के आईसीसी टूर्नामेंट रिकॉर्ड इस सोच को मजबूत करते हैं। वनडे विश्व कप, टी20 विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी, तीनों बड़े आईसीसी टूर्नामेंट्स में भारत का पाकिस्तान के खिलाफ रिकॉर्ड बेहद एकतरफा रहा है। टी20 और वनडे, दोनों तरह के विश्व कप को मिलाकर भारत का पाकिस्तान के खिलाफ जीत का रिकॉर्ड 15-1 का है।टीम इंडिया को एकमात्र हार 2021 टी20 विश्व कप में मिली थी। वनडे विश्व कप में पाकिस्तान भारत को कभी नहीं हरा सका है और हमेशा मुंह की खाई है। साल 2001 से अब तक, दोनों टीमों के बीच नडे विश्व कप, टी20 विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी को मिलाकर 19 मुकाबले खेले गए हैं। इसमें से पाकिस्तान सिर्फ चार मैच जीता है। 15 में उसे मुंह की खानी पड़ी है। 2003, 2011, 2015, 2019 और 2023 के वनडे विश्व कप और 2007, 2012, 2014, 2016, 2022 और 2024 के टी20 विश्व कप, इन सभी बड़े मंचों पर पाकिस्तान भारत के सामने संघर्ष करता नजर आया। तो उसे बॉयकॉट का बहाना तो बनाना ही था। यही कारण है कि भारत-पाकिस्तान मैच अब रोमांच से ज्यादा औपचारिकता लगने लगा है।

एशिया कप में भारत से तीनों मैच हारा पाकिस्तान

मांजरेकर ने पाकिस्तान क्रिकेट की गिरावट का जिक्र करते हुए एशिया कप का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा, ‘मैंने यह गिरावट एशिया कप में भी देखी। आपको बस भारतीय क्रिकेट सिस्टम और पाकिस्तानी क्रिकेट सिस्टम से आने वाले युवा खिलाड़ियों की तुलना करनी है। यह फर्क जमीन और आसमान जैसा है।’ यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेट स्ट्रक्चर पर सवाल खड़े करता है। एशिया कप टी20 2025 में भारत ने पाकिस्तान को तीनों मुकाबले में शिकस्त दी थी। तब यह बातें उठी थीं कि भारत को पाकिस्तान के खिलाफ मैच को बॉयकॉट करना चाहिए, लेकिन टीम इंडिया ने मैदान पर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था और फाइनल समेत तीनों मौकों पर हराया था। अब पाकिस्तान उसके उलट पहले ही हार मान ली है, क्योंकि खेल में वह हमसे बराबरी नहीं कर सकते।

क्या इसी डर से बॉयकॉट की बातें?

अब पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ मैच को लेकर बॉयकॉट या यूं कहें खेलने से इनकार जैसी बातें कही गई हैं। इस पर मांजरेकर का रुख बिल्कुल साफ है। उनका मानना है कि अगर आत्मविश्वास होता, तो मैदान छोड़ने की बात नहीं होती। उन्होंने कहा, ‘भारत-पाकिस्तान मैच हो या न हो, मेरे लिए यह कोई बड़ा इवेंट नहीं है।’ मांजरेकर ने यह भी साफ किया कि भारतीय टीम की असली परीक्षा पाकिस्तान नहीं, बल्कि दुनिया की टॉप टीमें हैं। उन्होंने कहा, ‘ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका, ये वो टीमें हैं, जिन्हें हराकर हमें इस भारतीय टीम पर गर्व महसूस होगा।’ यानी पाकिस्तान अब उस सूची में शामिल नहीं है, जिससे भारत की श्रेष्ठता तय हो।

‘मैच न हो तो भी टूर्नामेंट की वैल्यू कम नहीं’

भारत-पाकिस्तान मैच को टूर्नामेंट की जान कहे जाने पर मांजरेकर ने खुलकर असहमति जताई। उन्होंने कहा, ‘अगर भारत-पाकिस्तान मैच नहीं होता, तो दुर्भाग्यपूर्ण जरूर है, क्योंकि कोई वॉकओवर या फॉरफिट नहीं चाहता, लेकिन इससे टूर्नामेंट की वैल्यू कम नहीं होती।’ उनके मुताबिक, असली मुकाबले उन टीमों के खिलाफ होते हैं जो लगातार भारत को चुनौती देती हैं। जब लगातार हार मिल रही है, तो पाकिस्तान टीम के भीतर डर बैठना स्वाभाविक है। अगर पाकिस्तान और उनके ट्रॉफी चोर अध्यक्ष मोहसिन नकवी को भरोसा होता कि वह मुकाबला जीत सकते हैं, तो खेलने से क्यों बचते? क्रिकेट सिर्फ स्किल का खेल नहीं, बल्कि मेंटल स्ट्रेंथ का भी इम्तिहान है। भारत ने पिछले दो दशकों में न सिर्फ मजबूत टीम बनाई, बल्कि बड़े मुकाबलों में जीतने की आदत भी डाली। वहीं पाकिस्तान टीम बार-बार भारत के खिलाफ हार झेलने के बाद उसी मनोवैज्ञानिक जाल में फंसती चली गई।

डर, गिरता आत्मविश्वास और बदलती राइवलरी

एक दौर था जब भारत-पाकिस्तान मुकाबला दोनों टीमों के लिए बराबरी का युद्ध होता था। आज हालात यह हैं कि भारत मानसिक और क्रिकेटिंग, दोनों स्तर पर आगे निकल चुका है। पाकिस्तान की बार-बार की हार ने उसके आत्मविश्वास को कमजोर किया है, और यही डर अब बॉयकॉट जैसे बयानों में नजर आता है। शानदार युवा बल्लेबाज, जसप्रीत बुमराह जैसे घातक गेंदबाज और मजबूत घरेलू सिस्टम, इन सबने भारत को आईसीसी टूर्नामेंट्स में लगातार ताकतवर बनाया है। वहीं पाकिस्तान अब भी अस्थिर चयन, कमजोर सिस्टम और मानसिक दबाव से जूझता दिखता है। 

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