#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत (Maharashtra politics) से एक चौंकाने वाली खबर आ रही है। खबर है कि उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना कथित तौर पर कल्याण डोंबिवली नगर निगम में राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नव निर्वाचित पार्षदों के साथ गठबंधन करने की योजना बना रही है। यह पहल तब हो रही है, जब महीने भर पहले ही राज ठाकरे और उनके चचेरे भाई और शिवसेना (UBT) के चीफ उद्धव ठाकरे करीब बीस सालों बाद एक हुए हैं और दोनों ने मिलकर बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव लड़ा है।
आंकड़ों का खेल
107 वार्डों वाली कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में शिंदे गुट की शिवसेना के पास 53 सीटें हैं। भाजपा के पास 50 सीटें हैं, जबकि MNS के पास 5 सीटें हैं। शिवसेना (UBT) की 11, एनसीपी (SP) की 1 सीट और कांग्रेस की 2 सीटें हैं। नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा 62 है। भाजपा और शिंदे सेना दोनों मिलकर बहुमत से काफी आगे हैं, लेकिन मेयर पद को लेकर दोनों सहयोगियों के बीच खींचतान की खबरें हैं। ऐसे में MNS के पांच नगरसेवक अहम भूमिका निभा सकते हैं।
यदि शिंदे सेना को MNS का समर्थन मिलता है, तो उसका आंकड़ा 58 तक पहुंच जाएगा, जो बहुमत से सिर्फ 4 कम है। यहीं पर MNS के पांच पार्षद बहुमत जुगाड़ के काम आ सकते हैं। NDTV के मुताबिक, इसी बहुमत के जुगाड़ के लिए शिंदे सेना MNS के इन पांचों पार्षदों के साथ गठबंधन करना चाह रही है।
MNS कोई AIMIM नहीं है
रिपोर्ट में कहा गया है कि शिवसेना के एकनाथ शिंदे और नरेश म्हस्के, और MNS नेता राजू पाटिल के बीच हुई एक बैठक ने चुनाव बाद इस समर्थन की चर्चा को हवा दी है। हालांकि, म्हास्के ने इन दावों को खारिज कर दिया कि यह राजनीतिक बदलाव महायुति में फूट की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा, “हमने कल्याण डोंबिवली नगर निगम चुनाव शिवसेना-BJP महायुति के तौर पर लड़ा था और हम महायुति के तौर पर ही सत्ता संभालेंगे।” MNS से संभावित गठजोड़ पर उन्होंने कहा, “अगर विकास के लिए सभी साथ आना चाहते हैं तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। MNS कोई AIMIM नहीं है। यह शहर स्तर की विकास की राजनीति है।”
MNS का पक्ष: ‘स्थिरता के लिए समर्थन’
दूसरी तरफ, MNS नेता राजू पाटिल ने कहा कि उनकी पार्टी का यह रुख नगर निगम में स्थिरता बनाए रखने के लिए है। उन्होंने कहा, “भाजपा और शिवसेना साथ मिलकर लड़ रहे हैं। उन्हें समर्थन देकर हम भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अगर यह व्यवस्था बनती है तो एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम भी तैयार किया जाएगा।” पाटिल ने यह भी स्पष्ट किया कि राज ठाकरे ने स्थानीय नेतृत्व को क्षेत्रीय राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की छूट दी है।
संजय राउत का तीखा हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा, “जो महाराष्ट्र से गद्दारी करते हैं, वे गद्दार हैं और जो उनका साथ देते हैं, वे भी उसी श्रेणी में आते हैं। सिर्फ सत्ता न मिलने पर इस तरह का बेईमान व्यवहार महाराष्ट्र माफ नहीं करेगा।” राउत ने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर उद्धव ठाकरे नाराज़ हैं और उन्होंने राज ठाकरे से इस पर बात भी की है। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “जो लोग इस तरह पार्टियां बदलते हैं, वे राजनीतिक मनोरोगी हैं।”
बढ़ता सियासी तनाव
कल्याण-डोंबिवली का यह घटनाक्रम न सिर्फ स्थानीय राजनीति बल्कि ठाकरे परिवार के हालिया मेल-मिलाप पर भी सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि MNS नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या अंतिम रुख अपनाता है और इसका असर महाराष्ट्र की व्यापक राजनीति पर कितना पड़ता है।
