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बदरी-केदार समेत उत्तराखंड के 47 मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, बीकेटीसी का बड़ा फैसला

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देहरादून: उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2026 की 19 अप्रैल से शुरुआत होने जा रही है. इस दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट खुलेंगे. चारधाम यात्रा के दृष्टिगत श्रद्धालुओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी 6 मार्च से शुरू हो गई है. शासन प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं को पूरा कराया जा रहा है, ताकि चारधाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें. चारधाम में मोबाइल बैन का निर्णय सरकार पहले ही ले चुकी है. वहीं बदरी-केदार मंदिर समिति ने धामों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित किए जाने को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इसमें आगामी चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ और बदरीनाथ धाम परिसर में गैर हिंदू प्रवेश नहीं कर पाएंगे. इसके साथ ही बीकेटीसी ने उनके अधीन आने वाले 45 अन्य मंदिरों में भी गैर हिंदुओं की एंट्री पर बैन लगा दिया है.

बदरी-केदार मंदिर समिति का बड़ा फैसला: 

दरअसल, उत्तराखंड में इसी साल जनवरी महीने में गंगा सभा ने हरकी पैड़ी पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग उठाई थी. इसके लिए, गंगा सभा ने हर की पैड़ी में जगह-जगह पर अहिंदु प्रवेश निषेध क्षेत्र के बोर्ड भी लगा दिए थे. इसके बाद यह मामला काफी अधिक चर्चाओं में रहा. हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार हर की पौड़ी स्नान के लिए पहुंचते हैं. गंगा सभा की ओर से गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित की मांग के बाद चारधाम में भी गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित की मांग उठने लगी. उस दौरान बदरी केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा था कि वो आगामी बोर्ड बैठक के दौरान बीकेटीसी के अधीन आने वाले मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित के प्रस्ताव को पारित करेंगे.

दरीनाथ-केदारनाथ समेत उत्तराखंड के 47 मंदिरों में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित: 

ऐसे में जहां एक ओर उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में बजट सत्र चल रहा है, तो वहीं दूसरी ओर मंगलवार यानी 10 मार्च को देहरादून स्थित बीकेटीसी के शिविर कार्यालय में बजट बैठक आहूत की गयी. बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई बजट बैठक के दौरान आगामी वित्तीय वर्ष 2026- 27 के लिए 121.7 करोड़ रुपए का बजट पारित किया गया. साथ ही सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी मुहर लगी, जिस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई थी. दरअसल, बजट बैठक के दौरान बदरीनाथ और केदारनाथ धाम समेत बीकेटीसी के अंडर आने वाले उत्तराखंड के 47 मंदिरों में गैर सनातनियों के प्रवेश वर्जित का प्रस्ताव रखा गया. इस पर सहमति बनने के साथ ही इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया.

मुस्लिम नेता और संगठन पहले ही दे चुके हैं मिलीजुली प्रतिक्रिया: 

दरअसल, जब उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित की मांग उठ रही थी, तो उस दौरान विपक्षी दल कांग्रेस समेत तमाम संगठनों की ओर से इस पर सवाल खड़े किए गए थे. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने दिल्ली में प्रेस वार्ता कर कहा था कि हरिद्वार में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित के पोस्टर लगाना संविधान का मखौल उड़ाने जैसा है. यह छुआछूत है और समानता के अधिकार का सीधा-सीधा उल्लंघन है. अगर आप इस तरह की विचारधारा रखते हैं, तो इसका मतलब आप कानून को नहीं मानते हैं. इसके साथ ही जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने भी कहा था ऐसे प्रतिबंध समाज में विभाजन की भावना को बढ़ा सकते हैं. यह भारत की साझा संस्कृति और आपसी सम्मान की भावना के विपरीत है. इसके बाद ही राष्ट्रीय स्तर पर बयान बाजियों का दौर शुरू हो गया था.

डॉ इलियासी ने किया था समर्थन: ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने का समर्थन कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि यह धर्म का मामला है और धर्म का अपना महत्व है. अगर मंदिर कमेटी यह तय करती है कि गैर-हिंदू धाम में नहीं जा सकते, तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. हर जगह के अपने नियम होते हैं. मुसलमानों को शायद गंगोत्री नहीं जाना चाहिए और अगर वे जाते हैं, तो इससे विवाद हो सकता है. दूसरे धर्मों की पवित्र जगहों पर जाने से बचना बेहतर है. मक्का और मदीना में गैर-मुसलमानों को इजाज़त नहीं है, लेकिन कोई इस पर आपत्ति नहीं करता. ऐसे मामलों में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए.

सीएम धामी ने फैसला मंदिर समितियों पर छोड़ा था: 

उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित किए जाने की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस बात पर जोर दिया था कि धार्मिक स्थलों का संचालन करने वाले लोगों से बातचीत कर निर्णय लिया जाएगा. उस दौरान सीएम ने कहा था कि प्रदेश के जितने भी धार्मिक स्थल, पौराणिक स्थल और देवस्थान हैं, इन स्थानों को देखने वाले और उनका संचालन करने वाले, सभी धार्मिक संगठनों के लोग, तीर्थ सभा के लोग, गंगा सभा के लोग, केदार सभा के लोग, बदरी- केदार मंदिर समिति के लोग और पूज्य संत समाज हैं, ये सभी लोग ही धार्मिक स्थलों का संचालन करते हैं. ऐसे में इन सभी की जो राय और मत होगा उसी के अनुसार सरकार आगे बढ़ेगी, क्योंकि ये स्थान बहुत पौराणिक महत्व के स्थान हैं.

अब अन्य पौराणिक मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग उठ सकती है: 

हालांकि, राज्य सरकार प्रदेश में मौजूद धार्मिक स्थलों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित किए जाने संबंधित अभी कोई निर्णय नहीं ले पाई है, जबकि आगामी चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है. इसी बीच बदरी केदार मंदिर समिति ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम समेत 47 मंदिरों में गैर सनातनियों का प्रवेश वर्जित करने का निर्णय ले लिया है. साथ ही अपने बजट बैठक में भी प्रस्ताव पारित कर दिया है. ऐसे में आगामी चारधाम यात्रा के दौरान बीकेटीसी के अधीन आने वाले बदरीनाथ और केदारनाथ समेत 47 मंदिरों में अब गैर हिंदू प्रवेश नहीं कर पाएंगे. बीकेटीसी के इस निर्णय के बाद संभावना जताई जा रही है कि प्रदेश में मौजूद अन्य पौराणिक एवं धार्मिक मंदिरों में भी गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित की मांग तेज हो सकती है.

बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा लंबे समय से मांग उठ रही थी: 

ज्यादा जानकारी देते हुए बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि-

जो हिंदुत्व एवं सनातन धर्म को मानने वाले हैं और जिनकी बाबा केदारनाथ और बदरी विशाल में आस्था है, वही हिंदू हैं और वही सनातनी हैं. ऐसे में सनातन धर्म को मानने वाले लोगों का हम स्वागत करते हैं. लेकिन जो सनातन धर्म को मानने वाले लोग नहीं हैं, उनको पूरी तरह से मंदिर क्षेत्र में आने से प्रतिबंधित किया गया है. बदरी केदार मंदिर समिति के अधीन मंदिर और मंदिर परिसर का संचालन है. ऐसे में केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम समेत 47 मंदिरों के गर्भगृह और मंदिर परिसर में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया गया है. प्रदेश में लंबे समय से इसकी मांग भी उठ रही थी.
-हेमंत द्विवेदी, अध्यक्ष, बीकेटीसी-

धामों की पवित्रता के लिए लिया फैसला- हेमंत द्विवेदी: 

साथ ही बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि उत्तराखंड के अंदर अवैध मजारों का निर्माण हुआ है, धर्म विशेष के लोगों ने धार्मिक आस्था के नाम पर लैंड जिहाद किया और यहां का माहौल खराब करने की कोशिश की है. उत्तराखंड में मौजूद धार्मिक स्थलों में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश दुनिया से आ रहे हैं. ऐसे में तीर्थ स्थलों की धार्मिक और पौराणिक आस्था एवं पवित्रता को किस तरह से कायम रखा जाए, इस पर जोर दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु सिर्फ तीर्थाटन के लिए ही वहां पहुंचें. इस वजह से इस तरह के निर्णय लेने पड़े हैं.

हेमंत द्विवेदी बोले संविधान के तहत लिया फैसला:

बदरीनाथ- केदारनाथ समेत 47 मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित के बाद प्रदेश में मौजूद अन्य धार्मिक स्थलों में भी गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित किए जाने के सवाल पर हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सबकी अपने-अपने धर्म के प्रति आस्था है. सबको अपने धर्म को किस तरह से चलाना है, उसकी व्यवस्था संविधान में भी है. ऐसे में जितने भी धर्म हैं, उनकी अपनी परंपराएं हैं और उस तरह से उनकी व्यवस्थाओं को देखा जाता है. ऐसे में जितने भी सनातन धर्म और हिंदुओं के धार्मिक स्थल हैं वो भारत की आत्मा हैं. जहां पर देश दुनिया से लाखों तीर्थ यात्री आस्था और भाव के लिए हर साल पहुंचते हैं. ऐसे में उसकी पवित्रता, पौराणिकता और पहचान को बनाए रखने के लिए उसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है.

कितने क्षेत्र में गैर सनातनियों का प्रवेश प्रतिबंधित: 

उत्तराखंड एक पहाड़ी प्रदेश है. यहां ज्यादातर मंदिर पहाड़ियों पर स्थित हैं. ऐसे में मंदिर तक पहुंचने के लिए डोली, कंडी और घोड़े खच्चर इस्तेमाल किए जाते हैं. इनका संचालन गैर हिंदुओं द्वारा भी किया जाता है. बदरी-केदार मंदिर समिति ने 47 मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर जो प्रतिबंध लगाया है, उसका इन लोगों के रोजगार पर असर नहीं पड़ेगा. दरअसल प्रवेश पर रोक मंदिर परिसर और मंदिर के गर्भगृह पर लागू होगी. बाकी डोली, कंडी और घोड़े खच्चर के संचालक मंदिर परिसर के बाहर तक जा सकते हैं.

ये हैं वो 47 मंदिर जहां गैर हिंदुओं का प्रवेश हुआ बैन: 

बीकेटीसी ने जिन 47 मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है, उनके नाम इस प्रकार हैं. बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के साथ ही त्रियुगीनारायण मंदिर, नरसिंह मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर, कालीमठ मंदिर, ब्रह्मकपाल शिला एवं परिक्रमा- बदरीनाथ, तप्त कुंड, शंकराचार्य समाधि, मद्महेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर, योगध्यान बदरी, भविष्य बदरी, आदि बदरी, वृद्ध बदरी, माता मूर्ति मंदिर, वासुदेव मंदिर, गौरी कुंड मंदिर, आदिकेदारेश्वेर मंदिर, पांच शिला बदरीनाथ (नारद शिला, नृसिंह शिला, बाराही शिला, गरुड़ शिला और मार्कण्डेय शिला), पांच धाराएं (प्रह्लाद धारा, कूर्मा धारा, भृगु धारा, उर्वशी धारा और इंदिरा धारा), ऊखीमठ में उषा का मंदिर, कालिशिला और वसुधारा शामिल हैं.

गैर हिंदू या गैर सनातनी से आशय: 

बीकेटीसी और गंगोत्री यमुनोत्री मंदिर समितियां पहले ही साफ कर चुकी हैं कि गैर हिंदू मतलब जो सनातन धर्म को नहीं मानते उनका प्रवेश मंदिर में वर्जित किया गया है. हिंदू सनातन धर्म से निकले सिख, जैन और बौद्धों पर ये प्रतिबंध लागू नहीं होते हैं. ऐसे में इन तीनों धर्मों के लोग मंदिरों में जा सकेंगे.

बीकेटीसी क्या है? 

बीकेटीसी (BKTC) बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति है. इसके अधीन इन दोनों बड़े मंदिरों समेत 47 अन्य मंदिर आते हैं. बीकेटीसी इन मंदिरों की व्यवस्था देखती है. इसमें मंदिरों का प्रबंधन, सुरक्षा और रखरखाव शामिल हैं. बीकेटीसी 1939 के अधिनियम के तहत काम करती है. बदरी-केदार मंदिर समिति बदरीनाथ और केदारनाथ समेत अन्य मंदिरों के कपाट खुलने और बंद होने की व्यवस्था करती है. इसके साथ ही इन मंदिरों के विकास और तीर्थयात्रियों की सुख सुविधा के लिए बजट पास करना भी इनका जिम्मा है. मंगलवार को हुई बीकेटीसी की बजट बैठक में चारधाम यात्रा 2026 के लिए ₹121 करोड़ का बजट पास किया गया है. बीजेपी नेता हेमंत द्विवेदी अभी बीकेटीसी के अध्यक्ष हैं.

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